जाबजा देखा है

मै ने यार को जाबजा देखा है
कभी जाहिर कभी पिन्हा देखा है।
कभी नन्हे बच्चे की खिलखिलाहट
कभी उसकी मासूम सी जिद में
कभी उसके गुस्से मे देखा है
मै ने यार को जाबजा देखा है।
कभी माशूका की आखों के इंतजार में
कभी उसकी चूड़ी की खनक
कभी उसकी पायल की छनक में देखा है
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
कभी सर ब सजूद सज़र में
कभी महकते नाचते पत्तों में देखा है
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
कभी भूखी प्यासी नजरों में
कभी दुआओं के लिए उठे हाथों में देखा है।
मैं ने यार को जा बजा देखा है।
कभी कोयल की कूक कभी की पी कहां में
कभी फूलों के रंगों मे कभी बागों की खुशबू में देखा है।
मैं ने यार को जा बजा देखा है।
कभी कहकशां के रंगों में
कभी शाम के धुंधलके मे देखा है
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
कभी बारिश की बूंदों से जिन्दा करते जमीनों में
कभी लहलहाते सबजाजारों में देखा है
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
कभी फलों से लदे दरखतों में
कभी बंजर उजार दरखतों में देखा है।
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
कभी आंधी और सैलाब की तबाही के मंजर में
कभी वीरान घर के बसने में देखा है।
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
कभी जालिम के जुल्म में
कभी खिदमत भरे हाथों मे देखा है।
मैं ने यार को जाबजा देखा है।
हर तरफ हर कहीं जलवा अफरोज है।
कभी जलवाफगन कभी खामोश है वो।
उसी से रंगो बू की महफिल सजी है।
वही तो दिलों में धड़कता रहता है।
उसी से आबाद है कायनात के हर जर्रे
वही बस वही तो हमारा खुदा है।